भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक समीक्षा समिति की बैठक शुरू होने से पहले मंगलवार को शेयर बाजारों की शुरुआत मिली-जुली रही. घरेलू और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के बीच निवेशकों का रुख सावधानी भरा है.
दरअसल, देश के शेयर बाजार आज मामूली गिरावट के साथ खुले. सेंसेक्स सुबह 9.7 अंकों की गिरावट के साथ 36,573.04 पर, जबकि निफ्टी 3.6 अंकों की कमजोरी के साथ 10,908.65 पर खुला.
बीएसई का 30 कंपनियों का शेयर सूचकांक सेंसेक्स 42.81 अंक यानी 0.12 फीसदी घटकर 36,539.93 अंक पर चल रहा है. इसी तरह एनएसई का 50 कंपनियों का सूचकांक निफ्टी 16.45 अंक यानी 0.15 फीसदी गिरकर 10,895.80 अंक पर चल रहा है. सोमवार को सेंसेक्स 113.31 अंक चढ़कर 36,582.74 अंक पर और निफ्टी 18.60 अंक बढ़कर 10,912.25 अंक पर बंद हुआ था.
ब्रोकरों के अनुसार रिजर्व बैंक की तीन दिन चलने वाली मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक से पहले निवेशकों का रुख सावधानी भरा है. रिजर्व बैंक की बैठक आज शुरू होनी है. शुरुआती कारोबार में सबसे ज्यादा नुकसान में भारती एयरटेल का शेयर रहा, यह चार फीसदी घटकर चल रहा है. इसकी अहम वजह मूडीज द्वारा कंपनी की क्रेडिट रेटिंग एक स्तर घटाया जाना है.
साल 2018-19 के दौरान आयकर विभाग के पास जांच के लिए ऐसे 1,34,574 मामले चुने गए. साल 2017-18 के दौरान आयकर इनकम टैक्स एक्ट 1961 की धारा 142 (1) के तहत 2,99,937 जमाकर्ताओं को नोटिस भेजा गया, जिन्होंने नोटबंदी के दौरान बड़ी रकम जमा की थी, लेकिन इनकम टैक्स रिटर्न नहीं दाखिल किया.
गौरतलब है कि आयकर विभाग को यह आशंका पहले से थी कि नवंबर 2016 में नोटबंदी के बाद काला धन रखने वाले लोग बड़ी मात्रा में पुराने नोट बैंक में जमा करने की कोशिश करेंगे, इसलिए विभाग ने इस पर अंकुश के लिए तमाम कदम उठाए थे. सबसे पहले यह नियम आया कि 9 नवंबर से 30 दिसंबर, 2016 के बीच 2.5 लाख रुपये से ज्यादा जमा के लिए PAN अनिवार्य होगा. लेकिन लोगों ने इसका भी तोड़ निकाल लिया था और 50 हजार रुपये से कम के टुकड़े-टुकड़े में जमा करते रहे. इसके बाद एनुआल इनफॉर्मेशन रिटर्न रूल
में बदलाव किए गए. बैंकों और पोस्ट ऑफिस के लिए यह अनिवार्य बनाया गया कि 9 नवंबर से 30 दिसंबर, 2016 के बीच बचत खाता में 2.5 लाख से ज्यादा नकद जमा और चालू खाते में 12.5 से ज्यादा नकद जमा के लिए AIR हो यानी आयकर विभाग को इसक जानकारी दी जाए. इन सबकी वजह से ऐसे सभी बड़ी जमाओं का पता लग गया जिनके आय का स्रोत स्पष्ट नहीं था.
संसद में एक सवाल के जवाब में वित्त राज्य मंत्री शिव प्रताप शुक्ला ने इस बारे में आंकड़ा दिया था कि किस राज्य में ऐसे जांच वाले कितने मामले हैं. उन्होंने बताया था कि 2018-19 के दौरान इस मामले में सबसे आगे गुजरात था. इसके बाद कर्नाटक, गोवा, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना हैं. साल 2017-18 के दौरान तमिलनाडु सबसे आगे था, जिसके बाद गुजरात का स्थान था.
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